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मुरली ....

Posted On: 25 Aug, 2016 कविता में

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सभी स्वजनों को श्रीकृष्ण जन्म की बधाई
इस वर्ष हम ५२४२ वा जन्मदिन मना रहें हैं |
एक रचना -
उत्कल में सागर के तट पर
रोरित सिन्धु ने देखा था -
खोज रही थी,सोच रही थीं
कहाँ पड़े पद कमल तिहारे ?
वृन्दावन ,गोकुल ,यमुना तट
वंशी धुन सुन चित्रलिखित सब
कैसी धुन थी ???
रूपराशि तुमपर न्योछावर
स्वर्णकिरण सा वह दुकूल था
मेघनील वह वर्ण -युगंधर
विद्दुत राशी भ्रमित सी -मनहर
स्पंदित -जिज्ञासित तृष्णा
धरा -धरी मै मस्तक अपना
मुग्ध -मधुर -वंशीधुन -आतुर
परे काल गति से सुरभित सुर !!

shakuntla mishra



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
August 26, 2016

अत्यंत श्रेष्ठ कविता है यह शकुंतला जी । आपको कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं तथा इतनी उत्कृष्ट कविता के सृजन हेतु आपका हार्दिक अभिनंदन ।

    shakuntlamishra के द्वारा
    August 31, 2016

    जी आप सब के उत्साह वर्धन से मुझे भी लगता है मेरी कविता सार्थक है ,आभार |

meenakshi के द्वारा
August 25, 2016

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत आपको बधाई ! ‘मुरली’ अति सुंदर लगी .

    shakuntlamishra के द्वारा
    August 31, 2016

    आभारी हूँ मिनाक्षी जी

Shobha के द्वारा
August 25, 2016

प्रिय शकुंतला जी आज भी मथुरा वासी अपने कन्हैया की बांसुरी की धुन सुनने के लिए ललायित रहते हैं मधुर कविता

    shakuntlamishra के द्वारा
    August 31, 2016

    जी शोभा जी


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