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संसार

Posted On: 7 Apr, 2015 Others,कविता में

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कभी यूँ ही
सोचती हूँ !
कैसे बना यह संसार ?
तब ह्रदय अनुमान करता
सृष्टि है इतनी मनोरम
श्रिष्टि का करता भी होगा !
रोटी से पहले आटा है
आंटा बना है चक्की में
गेहूं है ,वर्षा है ,धरती है ,
सब के कर्ता भी हैं भगवन !

शकुंतला मिश्रा -संसार



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
April 15, 2015

आदरणीया शकुंतला मिश्रा जी ! सुप्रभात ! विचारणीय और सुन्दर रचना है ! जी..सत्य यही है कि संसार रूपी रचना है तो भगवान रूपी उसका रचनाकार भी है ! आशीर्वाद और शुभकामनाओं सहित !

    shakuntlamishra के द्वारा
    April 17, 2015

    आभारी हूँ नमन !


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