saanjh aai

Just another weblog

59 Posts

146 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14516 postid : 860573

आस ...

Posted On: 10 Mar, 2015 Others,कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

नहीं रुकतें हैं आस मेरे
निरंतर करतें हैं उपहास !
कहें हैं -रुको गति है जहाँ !
क्या कहा ?
गति है नाम तो रुकना कहा
?
असंभव है जब तक है श्वांस
नहीं रूकती है गति कभी
नहीं रुक सकती मेरी आस
बड़े हैं दुःख ,वेदना यहाँ
मगर मैं हो जाती निरुपाय
रुके ना आस ,रुके ना गति !
तो कैसे रुकूँ ,कहो मैं हाय !
यही है जीवन का अधिवास
मुझे है किन्तु त्रास में आस !!!

shakuntla  mishra-aas



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran