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नव वर्ष में ......

Posted On: 20 Jan, 2015 Others,कविता में

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नव वर्ष में …
लम्हे जो बिखरे हैं
टूटे हैं
चलो उनको पिरोतें हैं
रिश्तों की माला में !
कोहरे की चादर ओढ़
जख्मों को सी लेंगे !
अंजुरी भरे प्रेम की
पलकों में अश्रु भरे
पंथ मैं निहारती
खुद को अर्पित करती !
संध्या की लालिमा में
शुभ की आराधना में
खुद को मैं हार जाती
पर तुमको पाकर मैं ,
जीवन को जीत जाती !!!

शकुन्तला मिश्रा – नव वर्ष में



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
January 21, 2015

आदरणीया बहुत दिन से आप का स्मरण कर रहा था मैं ,आज आप को पढ़ने का पुनः सौभाग्य मिला ,सादर आभार |

    shakuntlamishra के द्वारा
    January 22, 2015

    मेरा सौभाग्य -आपने याद किया मैंने भी ब्लॉग पर आप सबको याद किया ! किसी वजह से नेट काम नहीं कर रहा था ! प्रणाम !!


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