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बदलाव की आस

Posted On: 9 Nov, 2014 Others,कविता में

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देश में कुछ बदलाव आया है !
अधिको ने महसूस किया है !
निराशा को आशा दिखी है !
शुरुआत अच्छी हुई है !
भूखे ,बेरोजगार ,कामगार , सब में एक आस जगी है !
मित्र कहते थे -
सब ऐसे ही चलेगा , कुछ नहीं बदलेगा
, धोखा खाओ ,धोखा जियो नेता ऐसे है ,कैसे बदलेगा ?
पर लगता है -
एक दिन बदलेगा !
देश ,समाज ,हम सब सुखी
उन्नत ,समृद्ध स्वच्छ सुन्दर भारत में बसेंगे !
हम सब भारत वासी कामना करतें हैं
हमारे नेता की बानी फले ,जो बोलें वो करें
ये आज न हुआ तो कभी नहीं होगा !!

शकुन्तला मिश्रा -बदलाव की आस



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
January 3, 2015

एक दिन बदलेगा ! देश ,समाज ,हम सब सुखी उन्नत ,समृद्ध स्वच्छ सुन्दर भारत में बसेंगे ! बहुत सुन्दर और प्रेरक कविता ! नववर्ष 2015 आपके और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो ! नववर्ष की बहुत बहुत बधाई !


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