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बड़े भाग्य की बात .....

Posted On: 14 Oct, 2014 Others,कविता में

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बड़े भाग्य की बात !
मथ रहा सिंधु !
है भारत आज !
है सर्प रहा फुप्कार ,जले संसार !
तुम रुको !!!
पियूष आएगा !
समझा दो उनको -
फिर से न चुरा कर पी लें सुधा हमारी !
इस बार जहर भी उनको पीना होगा ,
जो मिला सामने शत्रु तो मरना होगा !
हिम के शिखरों से आज उठी है ज्वाला ,
तांडवी तेज ने दी है धर्म की हाला !
संसार हमारा धीर ,धर्म देखेगा ,
हर भारत वासी नई नीति खेलेगा !

मंदिर ,मस्जिद ,गिरजा और गुरुद्वारों में ,
जब मिले काल गलियो में या शहरों में !
जय महाकाल !सत श्री अकाल !!
हम नहीं दीन, दुर्बल , मराल !

जन-जन के भीतर नई क्रान्ति बोलेगी ,
हर शहर ,गाँव और गली शांति डोलेगी !
विज्ञान भी अब हम धर्म के साथ गढ़ेंगे ,
“इसरो ” के संत नया इतिहास लिखेंगे
!
खुशहाली ,हरियाली और धर्म के पालक ,
भारत का बूढा ,बच्चा और हर बालक !!

शकुन्तला मिश्रा -बड़े भाग्य की बात



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
October 16, 2014

शकुंतला जी उम्मीदों से लबरेज़ एक प्यारी सी कविता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद साभार

    shakuntlamishra के द्वारा
    October 17, 2014

    दीपावली की मंगल कामना के साथ आभारी हूँ यमुना जी !

sadguruji के द्वारा
October 16, 2014

समझा दो उनको – फिर से न चुरा कर पी लें सुधा हमारी ! इस बार जहर भी उनको पीना होगा , जो मिला सामने शत्रु तो मरना होगा ! सुन्दर लाजबाब पंक्तियाँ ! बहुत विचारणीय सन्देश ! आदरणीया शकुन्तला मिश्रा जी ! इस अतिसुन्दर संदेशपरक कृति के सृजन के लिए आपका अभिनन्दन और बहुत बहुत बधाई !

    shakuntlamishra के द्वारा
    October 17, 2014

    सद्गुरु जी को नमन ! मैं आपकी आभारी हूँ ,दीपावली पर्व पर मंगल कामना के साथ !


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