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तुम इसी से गुजरना

Posted On: 3 Sep, 2014 Others,कविता में

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मैंने तुम्हारे लिए एक द्वार खोला है
जो उजाले से जाकर मिलता है !
तुम इसी से होकर गुजरना
तुम यही पर आना !
अंधकार बड़ा गहरा है
असुरक्षित खाई है !
वो तुम्हारा पथ नहीं है !
तुम्हारी सुरक्षा के लिए ,
जीवटता के लिए ,
उत्तम भावना के लिए
मैंने एक राह खोली है
जो आसमा की ओर जाता है ,
तुम यही से होकर चलना !
मेरे तजुर्बे का निचोड़ ,
हर तकरीर की तहरीर ,
मेरे ख़्वाबों की तावीर
बनाता है ये द्वार !
तुम इसी से गुजरना !
तुम इसी से गुजरना !!

तुम इसी से गुजरना -शकुन्तला मिश्रा



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
September 5, 2014

अति सुन्दर आदरणीया.बहुत उच्च कोटि का हितोपदेश अवश्य ही अपने से बहुत अनुभवी इंसान की आज्ञा पालन विना कुछ तर्क -वितर्क किये करनी चाहिए.सादर साधुवाद.कृति का प्रत्येक शब्द वेद वाक्य जैसा है .सादर आभार .

    shakuntlamishra के द्वारा
    September 10, 2014

    aabhari hoon


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