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रक्षा सूत्र .....

Posted On: 10 Aug, 2014 Others,कविता में

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प्रतिकूल परिस्थिति में भी ,
सेवायें जिनकी अतुलनीय !
है जंग और सरहद के बीच
उनको दिन रात सजग रहना ,
जीवन भर बंधे है रक्षा से ,
दृष्टि भी हटे ना लक्ष्यों से !
हिम के उच्च शिखर पर जो
अविराम चले और अड़े रहे !
वे भारत माँ के प्रहरी हैँ !!
“माँ “तभी रात भर सोती है
हम केसर ,चन्दन ,अक्षत की ,
इक रक्षा उनको देतें हैँ !
ताकि हम शान से रह पाएं
उनकी रक्षा से मेरी विजय ,
हम अपनी विजय मानाने को
भारत की शान बढ़ाने को
रक्षा का पर्व मनाएंगे !
“वीरों ” से रक्षित होने को ,
इक रक्षा सूत्र है वीरों का
एक रक्षा सूत्र है “वीरा “का
हम सब आपस में रक्षित हो ,
इक सूत्र इस तरह भी बांधे
कोई भय ना रहे ,कही छल ना रहे !
बस एक मानव का धर्म रहे !
हर मानव से यह धर्म निभे !
हर मानव से यह धर्म निभे !!

रक्षा सूत्र -शकुंतला मिश्रा



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

रमेश भाई आँजना के द्वारा
August 12, 2014

great ,,,,,bahut sunder ji… behad pyaari panktiyaa,,,apne unki bhavnaye or sachhi kahani baya ki he,,

    shakuntlamishra के द्वारा
    August 15, 2014

    aabhari hoon! aapne mera utsaah badhaya hai ramesh ji

sadguruji के द्वारा
August 11, 2014

प्रतिकूल परिस्थिति में भी , सेवायें जिनकी अतुलनीय ! है जंग और सरहद के बीच उनको दिन रात सजग रहना , जीवन भर बंधे है रक्षा से , दृष्टि भी हटे ना लक्ष्यों से ! सुन्दर और प्रेरक रचना ! रक्षा पर्व की शुभकामनाएं !

    shakuntlamishra के द्वारा
    August 11, 2014

    आभारी हूँ


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